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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 9 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 9 • ऋचा / मन्त्र 1

6.9.1

Mantra ID: 6.9.1

अह॑श्च कृ॒ष्णमह॒रर्जु॑नं च॒ वि व॑र्तेते॒ रज॑सी वे॒द्याभिः॑ । वै॒श्वा॒न॒रो जाय॑मानो॒ न राजावा॑तिर॒ज्ज्योति॑षा॒ग्निस्तमां॑सि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.9.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

काली रात और उजला दिन अपनी प्रवृत्तियों द्वारा धरती व आकाश को पृथकू करते हैं. वैश्वानर अग्नि तेजस्वी के समान उत्पन्न होकर अपने प्रकाश से अंधकार का नाश करते हैं. (१)

EN English Translation

Black night and bright days separate the earth and the sky by their instincts. Vaishnavars create like a agni of brightness and destroy the darkness with their light. (1)

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