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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 100 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 100 • ऋचा / मन्त्र 1

7.100.1

Mantra ID: 7.100.1

नू मर्तो॑ दयते सनि॒ष्यन्यो विष्ण॑व उरुगा॒याय॒ दाश॑त् । प्र यः स॒त्राचा॒ मन॑सा॒ यजा॑त ए॒ताव॑न्तं॒ नर्य॑मा॒विवा॑सात् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.100.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो मनुष्य बहुत से लोगों द्वारा प्रशंसायोग्य विष्णु को हव्य देता है, एक साथ बहुत से मंत्र बोलकर पूजा करता है एवं मानवहितकारी विष्णु की सेवा करता है, वह मनुष्य अपने इच्छित धन को शीघ्र प्राप्त करता है. (१)

EN English Translation

The man who gives a greeting to Vishnu, who is praised by many people, worships by speaking many mantras at the same time and serves the man-benevolent Vishnu, that man gets his desired wealth quickly. (1)

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