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7.100.3
त्रिर्दे॒वः पृ॑थि॒वीमे॒ष ए॒तां वि च॑क्रमे श॒तर्च॑सं महि॒त्वा । प्र विष्णु॑रस्तु त॒वस॒स्तवी॑यान्त्वे॒षं ह्य॑स्य॒ स्थवि॑रस्य॒ नाम॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.100.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
विष्णुदेव ने सौ किरणों वाली धरती पर अपनी महिमा से तीन बार चरण रखा. वृद्धों से भी वृद्ध विष्णु हमारे स्वामी हों. वृद्धिप्राप्त विष्णु का रूप तेजशाली है. (३)
EN English Translation
Vishnudev set his feet on the earth of hundred rays three times with his glory. May Vishnu, older than the elderly, be our lord. The form of the rising Vishnu is bright. (3)