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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 100 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 100 • ऋचा / मन्त्र 5

7.100.5

Mantra ID: 7.100.5

प्र तत्ते॑ अ॒द्य शि॑पिविष्ट॒ नामा॒र्यः शं॑सामि व॒युना॑नि वि॒द्वान् । तं त्वा॑ गृणामि त॒वस॒मत॑व्या॒न्क्षय॑न्तम॒स्य रज॑सः परा॒के ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.100.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे तेजस्वी विष्णु! स्तुतियों के स्वामी एवं जानने योग्य बातों को जानने वाले हम आज तुम्हारे प्रसिद्ध नाम को कहेंगे. हम वृद्धिरहित होकर भी अत्यंत वृद्धिशाली तुम्हारी स्तुति करेंगे. तुम रज अर्थात्‌ धरालोक के परे रहते हो. (५)

EN English Translation

O bright Vishnu! The lord of the praises and those who know things worth knowing, we will call your famous name today. We will praise you even without growth, even if we are very prosperous. You live beyond Raja i.e. Dharalok. (5)

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