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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 2 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 2 • ऋचा / मन्त्र 6

7.2.6

Mantra ID: 7.2.6

उ॒त योष॑णे दि॒व्ये म॒ही न॑ उ॒षासा॒नक्ता॑ सु॒दुघे॑व धे॒नुः । ब॒र्हि॒षदा॑ पुरुहू॒ते म॒घोनी॒ आ य॒ज्ञिये॑ सुवि॒ताय॑ श्रयेताम् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.2.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

युवा, दिव्य, महान्‌, कुशों पर बैठे हुए, बहुतों द्वारा स्तुत, संपत्ति के स्वामी एवं यज्ञ के पात्र निशा-दिवस कामधेनु गाय के समान कल्याण के निमित्त हमारा आश्रय लें. (६)

EN English Translation

Young, divine, great, sitting on the kushas, praised by many, the lord of property and the character of the yagna, nisha-din kamdhenu take shelter for the sake of the welfare of the cow. (6)

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