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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 23 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 5

7.23.5

Mantra ID: 7.23.5

ते त्वा॒ मदा॑ इन्द्र मादयन्तु शु॒ष्मिणं॑ तुवि॒राध॑सं जरि॒त्रे । एको॑ देव॒त्रा दय॑से॒ हि मर्ता॑न॒स्मिञ्छू॑र॒ सव॑ने मादयस्व ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.23.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! नशीला सोम तुम्हें प्रसन्न करे. तुम स्तोता को शक्तिशाली एवं धनवान्‌ पुत्र देते हो. हे शूर इंद्र! देवों में एकमात्र तुम्हीं मानवों के प्रति दया करते हो. तुम इस यज्ञ में प्रसन्न बनो. (५)

EN English Translation

O Indra! Let The Intoxicating Mon please you. You give the Psalms a powerful and rich son. O Shur Indra! You are the only one of the gods who have mercy on human beings. You be pleased in this yajna. (5)

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