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7.26.5
ए॒वा वसि॑ष्ठ॒ इन्द्र॑मू॒तये॒ नॄन्कृ॑ष्टी॒नां वृ॑ष॒भं सु॒ते गृ॑णाति । स॒ह॒स्रिण॒ उप॑ नो माहि॒ वाजा॑न्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.26.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वसिष्ठ ऋषि सोमरस निचुड़ जाने पर मनुष्यों की रक्षा के लिए प्रजाओं के अभिलाषापूरक इंद्र की स्तुति इस प्रकार करते हैं. हे इंद्र! हमारे हजारों प्रकार के अन्न एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५)
EN English Translation
Vasishta sage Somras praises Indra, the wisher of the people, to protect humans when they go to Such a place. O Indra! Protect us forever with thousands of our kinds of food and welfare tools. (5)