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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 63 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 2

7.63.2

Mantra ID: 7.63.2

उद्वे॑ति प्रसवी॒ता जना॑नां म॒हान्के॒तुर॑र्ण॒वः सूर्य॑स्य । स॒मा॒नं च॒क्रं प॑र्या॒विवृ॑त्स॒न्यदे॑त॒शो वह॑ति धू॒र्षु यु॒क्तः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.63.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मनुष्यों को अपने-अपने काम में लगाने वाले, पूज्य, ज्ञापन एवं जल देने वाले सूर्य सबके पहियों को समान रूप से चलाने की इच्छा से उदित होते हैं. रथ में जुड़े हुए हरे रंग के घोड़े सूर्य को खींचते हैं. (२)

EN English Translation

The suns that put humans into their work, the gods, the memos and the water, rise from the desire to drive the wheels of all equally. The green horses attached in the chariot pull the sun. (2)

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