Popular:
ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 63 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 5

7.63.5

Mantra ID: 7.63.5

यत्रा॑ च॒क्रुर॒मृता॑ गा॒तुम॑स्मै श्ये॒नो न दीय॒न्नन्वे॑ति॒ पाथः॑ । प्रति॑ वां॒ सूर॒ उदि॑ते विधेम॒ नमो॑भिर्मित्रावरुणो॒त ह॒व्यैः ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 7.63.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मरणरहित देवों ने अंतरिक्ष में सूर्य के लिए मार्ग बनाया था. वह मार्ग उड़ते हुए गिद्ध के समान अंतरिक्ष का अनुगमन करता है. हे मित्र व वरुण! सूर्य के उदय होने पर हम नमस्कारों व हव्यों द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. (५)

EN English Translation

The godless god made way for the sun in space. That path follows space like a flying vulture. Oh my friend and Varun! When the sun rises, we will serve you with greetings and salutations. (5)

卐 HinduText AI