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7.67.1
प्रति॑ वां॒ रथं॑ नृपती ज॒रध्यै॑ ह॒विष्म॑ता॒ मन॑सा य॒ज्ञिये॑न । यो वां॑ दू॒तो न धि॑ष्ण्या॒वजी॑ग॒रच्छा॑ सू॒नुर्न पि॒तरा॑ विवक्मि ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.67.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे ऋत्विज् व यजमानरूपी मनुष्यों के स्वामी अश्चिनीकुमारो! हम हव्य एवं स्तोत्र लेकर तुम्हारे रथ की स्तुति करने जाते हैं. हे स्तुतियोग्य अश्विनीकुमारो! जैसे पुत्र पिता को जगाता है, उसी प्रकार दूतरूप में जगाने वाले तुम्हारे रथ को अपने सामने आने के लिए मैं स्तुति करता हूं. (१)
EN English Translation
O Aschinikumaro, lord of the host of men! We go with a greeting and hymn to praise your chariot. O praiseworthy Ashwinikumaro! Just as the Son awakens the Father, so I praise your chariot that awakens in the form of a messenger to come before me. (1)