Popular:
ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 67 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 10

7.67.10

Mantra ID: 7.67.10

नू मे॒ हव॒मा श‍ृ॑णुतं युवाना यासि॒ष्टं व॒र्तिर॑श्विना॒विरा॑वत् । ध॒त्तं रत्ना॑नि॒ जर॑तं च सू॒रीन्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (१०)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 7.67.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे नित्यतरुण अश्विनीकुमारो! तुम आज मेरी पुकार सुनो, हव्ययुक्त घर में आओ, रत्नदान करो एवं स्तोता की उन्नति करो. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (१०)

EN English Translation

This nityatarun ashwinikumaro! You hear my call today, come into the house with a hawala, donate gems and make the gifts. Oh, God! You protect us forever by your welfare means. (10)

卐 HinduText AI