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7.67.4
अ॒वोर्वां॑ नू॒नम॑श्विना यु॒वाकु॑र्हु॒वे यद्वां॑ सु॒ते मा॑ध्वी वसू॒युः । आ वां॑ वहन्तु॒ स्थवि॑रासो॒ अश्वाः॒ पिबा॑थो अ॒स्मे सुषु॑ता॒ मधू॑नि ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.67.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे रक्षक एवं मधुविद्या कुशल अश्चिनीकुमारो! जब तुम्हारी अभिलाषा से सोमरस निचुड़ जाता है तब मैं धन की इच्छा से तुम्हारी स्तुति करता हूं. तुम्हारे स्वस्थ घोड़े तुम्हें यहां लावें. तुम हमारे द्वारा भली प्रकार निचोड़े गए सोमरस को पिओ. (४)
EN English Translation
O protector and master of honey, Aschinikumaro! When someras are dispelled by your desire, I praise you with the desire for wealth. May your healthy horses bring you here. You drink the somras well squeezed by us. (4)