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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 67 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 67 • ऋचा / मन्त्र 8

7.67.8

Mantra ID: 7.67.8

एक॑स्मि॒न्योगे॑ भुरणा समा॒ने परि॑ वां स॒प्त स्र॒वतो॒ रथो॑ गात् । न वा॑यन्ति सु॒भ्वो॑ दे॒वयु॑क्ता॒ ये वां॑ धू॒र्षु त॒रण॑यो॒ वह॑न्ति ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.67.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे भरण-पोषण करने वाले अश्चिनीकुमारो! जब तुम एक स्थान पर मिलते हो तो तुम्हारा रथ सात नदियों के पार जाता है. शोभनजन्म वाले एवं दिव्यशक्ति से युक्त तुम्हारे घोड़े तुम्हारे रथ को तेजी से खींचते हैं और कभी नहीं थकते. (८)

EN English Translation

O aschinikumaro who sustains! When you meet at one place, your chariot crosses seven rivers. Your horses with adornment and divine power pull your chariot fast and never get tired. (8)

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