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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 91 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 91 • ऋचा / मन्त्र 1

7.91.1

Mantra ID: 7.91.1

कु॒विद॒ङ्ग नम॑सा॒ ये वृ॒धासः॑ पु॒रा दे॒वा अ॑नव॒द्यास॒ आस॑न् । ते वा॒यवे॒ मन॑वे बाधि॒तायावा॑सयन्नु॒षसं॒ सूर्ये॑ण ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.91.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्राचीन काल में जिन वयोवृद्ध स्तोताओं ने वायु देव के हेतु शीघ्र बनाए गए बहुत से स्तोत्रों द्वारा प्रसिद्धि प्राप्त की, उन्होंने विपत्ति में पड़े मनुष्यों की रक्षा के निमित्त वायु को हव्य देने के लिए सूर्य के साथ उषा को संगत किया. (१)

EN English Translation

In ancient times, the veteran stoetas who rose to fame with many of the earliest made for the vayu dev, sanguine with the sun to give a tribute to the air in order to protect the human beings in distress. (1)

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