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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 95 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 95 • ऋचा / मन्त्र 6

7.95.6

Mantra ID: 7.95.6

अ॒यमु॑ ते सरस्वति॒ वसि॑ष्ठो॒ द्वारा॑वृ॒तस्य॑ सुभगे॒ व्या॑वः । वर्ध॑ शुभ्रे स्तुव॒ते रा॑सि॒ वाजा॑न्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.95.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शोभनधन वाली सरस्वती! यह वसिष्ठ तुम्हारे लिए यज्ञ के द्वार खोलता है. हे उज्ज्वल वर्ण वाली सरस्वती देवी! तुम वृद्धि प्राप्त करो एवं स्तोता को अन्न दो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (६)

EN English Translation

O Shobhandhan Wali Saraswati! This Vasishtha opens the doors of yajna for you. O goddess saraswati with bright colours! You get the growth and give the food to the hymn. Oh, God! You always follow us by means of well-being. (6)

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