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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 97 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 9

7.97.9

Mantra ID: 7.97.9

इ॒यं वां॑ ब्रह्मणस्पते सुवृ॒क्तिर्ब्रह्मेन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ अकारि । अ॒वि॒ष्टं धियो॑ जिगृ॒तं पुरं॑धीर्जज॒स्तम॒र्यो व॒नुषा॒मरा॑तीः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.97.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ब्रहमणस्पति! मैंने यह शोभन वचनरूपी स्तुति तुम्हारे एवं वज्रधारी इंद्र के लिए बनाई है. तुम हमारे यज्ञों की रक्षा करो, अनेक स्तुतियां सुनो एवं हम भक्तों पर आक्रमण करने वाली शत्रुसेना का नाश करो. (९)

EN English Translation

O Brahmaspati! I have made this glorious praise for you and the thunderbolt Indra. Protect our yagnas, listen to many praises and destroy the enemy army that attacks us devotees. (9)

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