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8.1.34
अन्व॑स्य स्थू॒रं द॑दृशे पु॒रस्ता॑दन॒स्थ ऊ॒रुर॑व॒रम्ब॑माणः । शश्व॑ती॒ नार्य॑भि॒चक्ष्या॑ह॒ सुभ॑द्रमर्य॒ भोज॑नं बिभर्षि ॥ (३४)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.1.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
आसंग राजा के सामने की ओर बिना हड्डी वाला, लंबा एवं नीचे की ओर लटकता हुआ स्थूल अर्थात् पुरुषेंद्रिय देखकर उसकी पत्नी ने कहा-हे आर्य! भोग का उत्तम साधन धारण करते हो. (३४)
EN English Translation
Seeing the asang king facing him, a boneless, long and a gross manly hanging on the bottom, his wife said, "O Arya! You possess the best means of enjoyment. (34)