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8.37.3
ए॒क॒राळ॒स्य भुव॑नस्य राजसि शचीपत॒ इन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ । माध्यं॑दिनस्य॒ सव॑नस्य वृत्रहन्ननेद्य॒ पिबा॒ सोम॑स्य वज्रिवः ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.37.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे यज्ञस्वामी इंद्र! तुम इस भवन के एकमात्र राजा के रूप में सुशोभित हो. तुम अपने समस्त रक्षासाधनों द्वारा ब्राह्मणों की रक्षा करो. हे निंदारहित, वज्रधारी एवं वृत्रहंता इंद्र! तुम माध्यंदिन सवन में सोमरस पिओ. (३)
EN English Translation
O Yajnaswamy Indra! You are adorned as the only king of this building. Protect the Brahmins with all your protective means. O blasphemous, thunderbolt and vrithrahanta Indra! You drink somras in the median savan. (3)