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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 39 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 7

8.39.7

Mantra ID: 8.39.7

अ॒ग्निर्दे॒वेषु॒ संव॑सुः॒ स वि॒क्षु य॒ज्ञिया॒स्वा । स मु॒दा काव्या॑ पु॒रु विश्वं॒ भूमे॑व पुष्यति दे॒वो दे॒वेषु॑ य॒ज्ञियो॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.39.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अग्नि देवों एवं यज्ञ योग्य प्रजाओं में निवास करते हैं. वे धरती के समान प्रसन्नतापूर्वक सारे कार्यों का पोषण करते हैं. देवों में यज्ञ के सर्वाधिक पात्र अग्नि सभी शत्रुओं को मारें. (७)

EN English Translation

Fire resides among the deities and the sacrificial beings. They nurture all the work as gladly as the earth. The most eligible agni of the yajna among the gods kill all the enemies. (7)

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