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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 41 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 9

8.41.9

Mantra ID: 8.41.9

यस्य॑ श्वे॒ता वि॑चक्ष॒णा ति॒स्रो भूमी॑रधिक्षि॒तः । त्रिरुत्त॑राणि प॒प्रतु॒र्वरु॑णस्य ध्रु॒वं सदः॒ स स॑प्ता॒नामि॑रज्यति॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.41.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अंतरिक्ष में निवास करने वाले जिस वरुण के तीन श्वेत तेज तीन भूमियों को विस्तृत करते हैं, उस वरुण का स्थान ध्रुव है. वरुण सातों नदियों के स्वामी हैं. वे सभी शत्रुओं को मारें. (९)

EN English Translation

The place of Varuna, whose three white rays dwell in space spans three lands, is the pole. Varuna is the lord of the seven rivers. They kill all the enemies. (9)

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