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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 42 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 42 • ऋचा / मन्त्र 4

8.42.4

Mantra ID: 8.42.4

आ वां॒ ग्रावा॑णो अश्विना धी॒भिर्विप्रा॑ अचुच्यवुः । नास॑त्या॒ सोम॑पीतये॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.42.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सत्य रूप वाले अश्चिनीकुमारो! विद्वान्‌ ऋत्विज्‌ एवं सोमरस निचोड़ने के काम आने वाले पत्थर अपने-अपने कमों के द्वारा सोमरस पान हेतु तुम्हारे सामने आते हैं. अश्विनीकुमार हमारे शत्रुओं को मारें. (४)

EN English Translation

O aschinikumaro of the true form! The learned ritwij and the stones used to squeeze the somras come before you for the paan of somras through their respective comers. Ashwinikumar kill our enemies. (4)

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