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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 52 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 10

8.52.10

Mantra ID: 8.52.10

तद्दधा॑ना अव॒स्यवो॑ यु॒ष्माभि॒र्दक्ष॑पितरः । स्याम॑ म॒रुत्व॑तो वृ॒धे ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.52.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋत्विजो! स्तोत्र धारण करने वाले एवं रक्षाभिलाषी हम तुम्हारे साथ मिलकर मरुतों सहित इंद्र की वृद्धि करने के लिए अन्न के पालक हों. (१०)

EN English Translation

Hey Ritvijo! Those who hold the hymns and are the protectors, we may join you to be the guardians of the food to increase Indra along with the maruts. (10)

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