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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 52 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 5

8.52.5

Mantra ID: 8.52.5

आदू॒ नु ते॒ अनु॒ क्रतुं॒ स्वाहा॒ वर॑स्य॒ यज्य॑वः । श्वा॒त्रम॒र्का अ॑नूष॒तेन्द्र॑ गो॒त्रस्य॑ दा॒वने॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.52.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! स्वाहा देवी के पति अग्नि का यज्ञ करने वाले लोग अनुक्रम से तुम्हारे ही कर्म की प्रशंसा करते हैं, स्तोता शीघ्र धन पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! The people who perform the yajna of Fire, the husband of Swaha Devi, praise your own karma in sequence, the stotas praise you for getting quick money. (5)

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