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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 72 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 72 • ऋचा / मन्त्र 2

8.72.2

Mantra ID: 8.72.2

ते नः॑ सन्तु॒ युजः॒ सदा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । वृ॒धास॑श्च॒ प्रचे॑तसः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.72.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवो! शोभन स्तुति वाले एवं हमारे धनवर्धक वरुण, मित्र एवं अर्यमा हमारे सहायक हों. (२)

EN English Translation

Oh, God! May the brave-praised and our rich Varun, friends and Aryama be our helpers. (2)

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