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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 74 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 74 • ऋचा / मन्त्र 5

8.74.5

Mantra ID: 8.74.5

छ॒र्दिर्य॑न्त॒मदा॑भ्यं॒ विप्रा॑य स्तुव॒ते न॑रा । मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.74.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे नेता अश्विनीकुमारो! स्तुति करने वाले ब्राह्मण कृष्ण के लिए शत्रुओं की हिंसा से रहित घर दो एवं सोमरस पीने के लिए आओ. (५)

EN English Translation

O leader Ashwinikumaro! Come to the house devoid of the violence of the enemies and drink somras for krishna, the brahmin who praises him. (5)

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