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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 75 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 75 • ऋचा / मन्त्र 3

8.75.3

Mantra ID: 8.75.3

यु॒वं हि ष्मा॑ पुरुभुजे॒ममे॑ध॒तुं वि॑ष्णा॒प्वे॑ द॒दथु॒र्वस्य॑‍इष्टये । ता वां॒ विश्व॑को हवते तनूकृ॒थे मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.75.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बहुतों का पालन करने वाले अश्विनीकुमारो! मेरे पुत्र विष्णायु को धन देने की इच्छा से तुमने धन दिया था. मैं अश्वक ऋषि संतान पाने के उद्देश्य से तुम्हें बुलाता हूं. हमारी मित्रता नष्ट मत करना. तुम यहां आकर अपने घोड़ों की लगाम अलग करो. (३)

EN English Translation

O ashwinikumaro who follows many! You gave money to my son Vishnuyu with the desire to give money. I call you with the aim of getting the offspring of sage Ashwaka. Don't destroy our friendship. You come here and separate the reins of your horses. (3)

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