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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 76 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 76 • ऋचा / मन्त्र 2

8.76.2

Mantra ID: 8.76.2

पिब॑तं घ॒र्मं मधु॑मन्तमश्वि॒ना ब॒र्हिः सी॑दतं नरा । ता म॑न्दसा॒ना मनु॑षो दुरो॒ण आ नि पा॑तं॒ वेद॑सा॒ वयः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.76.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्चिनीकुमारो! मधुर एवं पात्रों में टपकने वाले सोमरस को पिओ. हे नेताओ! यज्ञ के कुशों पर बैठो. तुम यजमान की यज्ञशाला में प्रसन्न होकर पुरोडाश आदि के साथ सोमरस पिओ. (२)

EN English Translation

O aschinikumaro! Drink the sweet and dripping somras in the characters. Hey leaders! Sit on the kushas of yajna. You are happy in the yajnashala of the host and drink somras with purodash etc. (2)

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