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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 77 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 77 • ऋचा / मन्त्र 6

8.77.6

Mantra ID: 8.77.6

नकिः॒ परि॑ष्टिर्मघवन्म॒घस्य॑ ते॒ यद्दा॒शुषे॑ दश॒स्यसि॑ । अ॒स्माकं॑ बोध्यु॒चथ॑स्य चोदि॒ता मंहि॑ष्ठो॒ वाज॑सातये ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.77.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे धनस्वामी इंद्र! तुम हव्यदाता यजमान को जो धन देते हो, उससे तुम्हें कोई नहीं रोक पाता. तुम अतिशय दानशील एवं धन के प्रेरक बनकर मुझ उचथ्य ऋषि का स्तोत्र सुनो. (६)

EN English Translation

O Dhanaswami Indra! No one can stop you from the money you give to the havyagar host. Listen to me the hymn of the sage High, being very charitable and inspiring of wealth. (6)

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