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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 83 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 83 • ऋचा / मन्त्र 5

8.83.5

Mantra ID: 8.83.5

पिब॑न्ति मि॒त्रो अ॑र्य॒मा तना॑ पू॒तस्य॒ वरु॑णः । त्रि॒ष॒ध॒स्थस्य॒ जाव॑तः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.83.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मित्र, अर्यमा और वरुण दशापवित्र द्वारा छने हुए, तीन पात्रों में स्थित एवं प्रशंसनीय जन्म पाने वाले सोम को पीते हैं. (५)

EN English Translation

Friends, Arayama and Varuna, dressed up by Dashapavittra, drink the som, who is located in three characters and is born admirable. (5)

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