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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 86 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 14

8.86.14

Mantra ID: 8.86.14

त्वं पुर॑ इन्द्र चि॒किदे॑ना॒ व्योज॑सा शविष्ठ शक्र नाश॒यध्यै॑ । त्वद्विश्वा॑नि॒ भुव॑नानि वज्रि॒न्द्यावा॑ रेजेते पृथि॒वी च॑ भी॒षा ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.86.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अतिशय बलशाली एवं शत्रुमारणसमर्थ इंद्र! तुम शंबर की इन नगरियों को शक्ति द्वारा नष्ट करना जानते हो. हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारे भय से सभी प्राणी एवं द्यावा-पृथिवी कांपते हैं. (१४)

EN English Translation

O very strong and hostile Indra! You know how to destroy these cities of Shambar by power. O thunderbolt Indra! All beings and earth tremble with your fear. (14)

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