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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 88 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 88 • ऋचा / मन्त्र 1

8.88.1

Mantra ID: 8.88.1

त्वामि॒दा ह्यो नरोऽपी॑प्यन्वज्रि॒न्भूर्ण॑यः । स इ॑न्द्र॒ स्तोम॑वाहसामि॒ह श्रु॒ध्युप॒ स्वस॑र॒मा ग॑हि ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.88.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वज्रधारी इंद्र! हवि धारण करने वाले यजमानों ने तुम्हें आज और कल सोमरस पिलाया था. तुम हम स्तोत्रधारियों की स्तुतियां सुनो एवं हमारे घर के पास आओ. (१)

EN English Translation

O thunderbolt Indra! The hosts who wore the hawi gave you somers today and tomorrow. Listen to the praises of us stothren and come to our house. (1)

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