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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 100 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 100 • ऋचा / मन्त्र 2

9.100.2

Mantra ID: 9.100.2

पु॒ना॒न इ॑न्द॒वा भ॑र॒ सोम॑ द्वि॒बर्ह॑सं र॒यिम् । त्वं वसू॑नि पुष्यसि॒ विश्वा॑नि दा॒शुषो॑ गृ॒हे ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.100.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम! तुम हमारे लिए दोनों लोकों में बढ़ने वाला धन लाओ एवं यजमान के घर में रहकर उसके पृथ्वी संबंधी एवं दिव्य धन को पुष्ट करो. (२)

EN English Translation

O glorious and pure Mon! Bring us the wealth that grows in both the realms and stay in the house of the host and confirm his earthly and divine wealth. (2)

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