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9.104.3
पु॒नाता॑ दक्ष॒साध॑नं॒ यथा॒ शर्धा॑य वी॒तये॑ । यथा॑ मि॒त्राय॒ वरु॑णाय॒ शंत॑मः ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.104.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे ऋत्विजो! शक्ति देने वाले सोम को दशापवित्र द्वारा शुद्ध करो. सोम वेग, देवों के रसपान और मित्रावरुण की सुखप्राप्ति के साधन हैं. (३)
EN English Translation
Hey Ritvijo! Purify the power-giving Mon with the dashapavittra. Som vega is the means of rasapan of the gods and the happiness of Mitravrun. (3)