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9.106.12
अस॑र्जि क॒लशा॑ँ अ॒भि मी॒ळ्हे सप्ति॒र्न वा॑ज॒युः । पु॒ना॒नो वाचं॑ ज॒नय॑न्नसिष्यदत् ॥ (१२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 9.106.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस प्रकार घोड़ा युद्ध के लिए तैयार किया जाता है, उसी प्रकार यजमान के लिए अन्न चाहने वाले सोम कलश में तैयार किए जाते हैं. छनते हुए सोम शब्द करते हैं एवं पात्रों में टपकते हैं. (१२)
EN English Translation
Just as the horse is prepared for war, so the soms who seek food for the host are prepared in the kalash. The word 'sieve mon' is made and drips into the characters. (12)