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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 106 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 106 • ऋचा / मन्त्र 14

9.106.14

Mantra ID: 9.106.14

अ॒या प॑वस्व देव॒युर्मधो॒र्धारा॑ असृक्षत । रेभ॑न्प॒वित्रं॒ पर्ये॑षि वि॒श्वतः॑ ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.106.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवाभिलाषी सोम! तुम अपनी धारा के रूप में नीचे गिरो. तुम्हारे मधुर रस की धाराएं बनाई जाती हैं. तुम शब्द करते हुए सब ओर से दशापवित्र पर जाते हो. (१४)

EN English Translation

O God, Mon! You fall down as your stream. Streams of your sweet juices are made. You go to dashapavittra from all sides while making words. (14)

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