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9.106.8
तव॑ द्र॒प्सा उ॑द॒प्रुत॒ इन्द्रं॒ मदा॑य वावृधुः । त्वां दे॒वासो॑ अ॒मृता॑य॒ कं प॑पुः ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.106.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सोम! जल की ओर बहने वाला तुम्हारा रस इंद्र को नशा करने के लिए बढ़ता है. देवगण मरणरहित बनने के लिए तुम्हारे सुखकर रस पीते हैं. (८)
EN English Translation
Hey Mon! Your juice flowing towards the water grows to intoxicate Indra. The gods drink your happy juice to become deathless. (8)