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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 107 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 107 • ऋचा / मन्त्र 2

9.107.2

Mantra ID: 9.107.2

नू॒नं पु॑ना॒नोऽवि॑भिः॒ परि॑ स्र॒वाद॑ब्धः सुर॒भिन्त॑रः । सु॒ते चि॑त्त्वा॒प्सु म॑दामो॒ अन्ध॑सा श्री॒णन्तो॒ गोभि॒रुत्त॑रम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.107.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अहिंसनीय, अत्यंत सुगंधि वाले एवं छनते हुए सोम! तुम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र में होकर नीचे टपको. तुम्हारे निचुड़ जाने पर हम तुम्हें सच्तुओं और गाय के दूधः दही से मिलाते हैं एवं जल में स्थित तुम्हारी सेवा करते हैं. (२)

EN English Translation

O non-violent, extremely fragrant and filtered Soma! You drip down into the dasapavitra made of sheep's hair. When you are squeezed, we mix you with curd, the milk of the cow and the cow, and serve you in the water. (2)

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