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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 107 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 107 • ऋचा / मन्त्र 4

9.107.4

Mantra ID: 9.107.4

पु॒ना॒नः सो॑म॒ धार॑या॒पो वसा॑नो अर्षसि । आ र॑त्न॒धा योनि॑मृ॒तस्य॑ सीद॒स्युत्सो॑ देव हिर॒ण्ययः॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.107.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम छनते समय जल में निवास करते हुए धारा के रूप में दशापवित्र में जाते हो. हे रत्नदाता सोम! तुम यज्ञस्थल में बैठते हो. हे दीप्तिशाली सोम! तुम बहने वाले एवं स्वर्णमय हो. (४)

EN English Translation

Hey Mon! You go to Dashapavitra as a stream while dwelling in the water while filtering. O Gems giving Mon! You sit in the place of yajna. O radiant Mon! You are flowing and golden. (4)

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