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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 110 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 110 • ऋचा / मन्त्र 5

9.110.5

Mantra ID: 9.110.5

अ॒भ्य॑भि॒ हि श्रव॑सा त॒तर्दि॒थोत्सं॒ न कं चि॑ज्जन॒पान॒मक्षि॑तम् । शर्या॑भि॒र्न भर॑माणो॒ गभ॑स्त्योः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.110.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जिस प्रकार कोई मनुष्य दूसरे लोगों के पानी पीने के लिए नित्यजल वाला तालाब खोदता है अथवा कोई भुजाओं की दसों उंगलियों से अंजलि बना कर जल भरता है, उसी प्रकार तुम अन्नप्राप्ति के लिए दशापवित्र को पार करके जाते हो. (५)

EN English Translation

Hey Mon! Just as a man digs a pond with regular water to drink other people's water, or someone fills the water by making an anjali with ten fingers of the arms, so you cross the dashapavitra to get food. (5)

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