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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 111 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 111 • ऋचा / मन्त्र 3

9.111.3

Mantra ID: 9.111.3

पूर्वा॒मनु॑ प्र॒दिशं॑ याति॒ चेकि॑त॒त्सं र॒श्मिभि॑र्यतते दर्श॒तो रथो॒ दैव्यो॑ दर्श॒तो रथः॑ । अग्म॑न्नु॒क्थानि॒ पौंस्येन्द्रं॒ जैत्रा॑य हर्षयन् । वज्र॑श्च॒ यद्भव॑थो॒ अन॑पच्युता स॒मत्स्वन॑पच्युता ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.111.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सबको जानने वाले सोम पूर्व दिशा की ओर जाते हैं. हे सोम! तुम्हारा दर्शनीय एवं दिव्य रथ सूर्य की किरणों के साथ मिलता है. मनुष्यों द्वारा की हुई स्तुतियां इंद्र के पास जाती हैं एवं इंद्र को विजय पाने के लिए हर्षित करती है. वज्र भी इंद्र के पास जाता है. हे सोम! तुम व इंद्र शत्रुओं से अपराजित रहकर स्तुतियां सुनते हो. (३)

EN English Translation

Mon, who knows everyone, goes east. Hey Mon! Your visible and divine chariot meets with the rays of the sun. The praises made by human beings go to Indra and make Indra rejoice to win. Vajra also goes to Indra. Hey Mon! You and Indra listen to praises from enemies. (3)

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