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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 112 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 112 • ऋचा / मन्त्र 1

9.112.1

Mantra ID: 9.112.1

ना॒ना॒नं वा उ॑ नो॒ धियो॒ वि व्र॒तानि॒ जना॑नाम् । तक्षा॑ रि॒ष्टं रु॒तं भि॒षग्ब्र॒ह्मा सु॒न्वन्त॑मिच्छ॒तीन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.112.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! हमारे तथा अन्य लोगों के कर्म विविध प्रकार के होते हैं. बढ़ई लकड़ी काटना चाहता है, वैद्य रोग की चिकित्सा करना चाहता है एवं ब्राह्मण सोमरस निचोड़ने वाले यजमान को चाहता है. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस बहाओ. (१)

EN English Translation

Hey Mon! Our and other people's actions are of different kinds. The carpenter wants to cut wood, the physician wants to cure the disease and the Brahmin wants the host to squeeze the somras. Hey Mon! You shed the juice for Indra. (1)

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