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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 113 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 113 • ऋचा / मन्त्र 3

9.113.3

Mantra ID: 9.113.3

प॒र्जन्य॑वृद्धं महि॒षं तं सूर्य॑स्य दुहि॒ताभ॑रत् । तं ग॑न्ध॒र्वाः प्रत्य॑गृभ्ण॒न्तं सोमे॒ रस॒माद॑धु॒रिन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.113.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

श्रद्धा नामक सूर्यपुत्री मेघ के समान समृद्ध और महान्‌ सोम को स्वर्ग से लाई थी. गंधर्वो ने उस सोम को पकड़कर उस में रस डाला. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (३)

EN English Translation

The Suryaputri named Shraddha brought the great som from heaven as rich and great as the cloud. Gandharvo grabbed that mon and poured juice into it. Hey Mon! You drip juice to Indra. (3)

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