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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 113 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 113 • ऋचा / मन्त्र 8

9.113.8

Mantra ID: 9.113.8

यत्र॒ राजा॑ वैवस्व॒तो यत्रा॑व॒रोध॑नं दि॒वः । यत्रा॒मूर्य॒ह्वती॒राप॒स्तत्र॒ माम॒मृतं॑ कृ॒धीन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.113.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! जिस लोक में विवस्वान्‌ के पुत्र राजा हैं, जहां स्वर्ग का द्वार है एवं जहां गंगा आदि विशाल नदियां स्थित हैं, मुझे उसी मरणरहित लोक में ले चलो एवं इंद्र के लिए अपना रस नीचे गिराओ. (८)

EN English Translation

Hey Mon! In the loka in which the sons of Vivasvan are the king, where there is a gate to heaven and where the great rivers of the Ganges are located, take me to the same godless realm and throw down your juice for Indra. (8)

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