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9.12.4
दि॒वो नाभा॑ विचक्ष॒णोऽव्यो॒ वारे॑ महीयते । सोमो॒ यः सु॒क्रतुः॑ क॒विः ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.12.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शोभन-बुद्धि वाले, कवि एवं विशेष द्रष्टा सोम अंतरिक्ष की नाभि के समान मेष के बालों पर पूजित होते हैं. (४)
EN English Translation
Soma, a poet and a special seer, is worshipped on the hair of Aries like the navel of space. (4)