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9.12.5
यः सोमः॑ क॒लशे॒ष्वाँ अ॒न्तः प॒वित्र॒ आहि॑तः । तमिन्दुः॒ परि॑ षस्वजे ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.12.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
कलशों एवं दशापवित्र नामक पात्र में रखे सोमरस की किरणों में सोमदेव प्रवेश करते हैं. (५)
EN English Translation
Somdev enters the rays of somras kept in the kalash and a vessel called Dashapavitra. (5)