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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 22 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 22 • ऋचा / मन्त्र 6

9.22.6

Mantra ID: 9.22.6

तन्तुं॑ तन्वा॒नमु॑त्त॒ममनु॑ प्र॒वत॑ आशत । उ॒तेदमु॑त्त॒माय्य॑म् ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.22.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नदियां यज्ञ का विस्तार करने वाले एवं उत्तम सोम को प्राप्त करती हैं. सोम इस कार्य को उत्तम बनाते हैं. (६)

EN English Translation

The rivers extend the yajna and attain the uttama soma. Mon makes this task the best. (6)

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