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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 3 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 3 • ऋचा / मन्त्र 10

9.3.10

Mantra ID: 9.3.10

ए॒ष उ॒ स्य पु॑रुव्र॒तो ज॑ज्ञा॒नो ज॒नय॒न्निषः॑ । धार॑या पवते सु॒तः ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.3.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये अनेक कर्मो वाले सोम उत्पन्न होते ही अन्नों को जन्म देते हुए निचुड़कर धारारूप में गिरते हैं. (१०)

EN English Translation

As soon as these many-performing mons are born, they fall into the stream form, giving birth to the grains. (10)

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