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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 43 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 43 • ऋचा / मन्त्र 5

9.43.5

Mantra ID: 9.43.5

इन्दु॒रत्यो॒ न वा॑ज॒सृत्कनि॑क्रन्ति प॒वित्र॒ आ । यदक्षा॒रति॑ देव॒युः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.43.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम युद्ध में जाने वाले घोड़े के समान दशापवित्र में शब्द करते हैं. सोम जब नीचे टपकते हैं, तब देवों के अभिलाषी बनकर शब्द करते हैं. (५)

EN English Translation

Som words in Dasapavitra like a horse going to war. When Soma drips down, he makes words by becoming the desire of the gods. (5)

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