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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 44 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 3

9.44.3

Mantra ID: 9.44.3

अ॒यं दे॒वेषु॒ जागृ॑विः सु॒त ए॑ति प॒वित्र॒ आ । सोमो॑ याति॒ विच॑र्षणिः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.44.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये जागरणशील एवं निचुड़े हुए सोम देवों के लिए सभी ओर जाते हैं एवं पवित्र होने के लिए दशापवित्र पर पहुंचते हैं. (३)

EN English Translation

They go all the way to the awakening and uninvited Som devas and reach Dashapavitra to be holy. (3)

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