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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 44 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 4

9.44.4

Mantra ID: 9.44.4

स नः॑ पवस्व वाज॒युश्च॑क्रा॒णश्चारु॑मध्व॒रम् । ब॒र्हिष्मा॒ँ आ वि॑वासति ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.44.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! ऋत्विज्‌ तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम हमारे लिए अन्न की इच्छा करते हुए एवं हमारे यज्ञ को कल्याणकारी बनाते हुए टपको. (४)

EN English Translation

Hey Mon! Ritwij serves you. You may, while wishing for food for us and making our yajna beneficial. (4)

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